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Thursday, March 18, 2010

दुनिया चले ना श्रीराम के बिनादुनिया चले ना श्रीराम के बिना

दुनिया चले ना श्रीराम के बिना |
रामजी चले ना हनुमान के बिना|| ध्रु. ||

सीताहरण की कहानी सुनो |
बनवारी मेरी जुबानी सुनो ||
सीताजी मिलेना श्रीराम के बिना |
पता चलेना हनुमान के बिना ||१||

लक्ष्मण का बचाना मुश्किल था |
कौन बूटी लाने के काबिल था ? ||
लक्ष्मण बचे ना श्रीराम के बिना |
बूटी मिलेना हनुमान के बिना ||२||

जबसे मैंने रामायण पढ़ली है |
मैंने एक बात समझली है ||
रावण मरे ना श्रीराम के बिना |
लंका जलेना हनुमान के बिना ||३||

सिंहासन पे बैठे है सीतारामजी |
चरणों मे बैठे है हनुमानजी ||
मुक्ति मिलेना श्रीराम के बिना |
शक्ति मिलेना हनुमान के बिना ||४||दुनिया चले ना श्रीराम के बिना
दुनिया चले ना श्रीराम के बिना |
रामजी चले ना हनुमान के बिना|| ध्रु. ||

सीताहरण की कहानी सुनो |
बनवारी मेरी जुबानी सुनो ||
सीताजी मिलेना श्रीराम के बिना |
पता चलेना हनुमान के बिना ||१||

लक्ष्मण का बचाना मुश्किल था |
कौन बूटी लाने के काबिल था ? ||
लक्ष्मण बचे ना श्रीराम के बिना |
बूटी मिलेना हनुमान के बिना ||२||

जबसे मैंने रामायण पढ़ली है |
मैंने एक बात समझली है ||
रावण मरे ना श्रीराम के बिना |
लंका जलेना हनुमान के बिना ||३||

सिंहासन पे बैठे है सीतारामजी |
चरणों मे बैठे है हनुमानजी ||
मुक्ति मिलेना श्रीराम के बिना |
शक्ति मिलेना हनुमान के बिना ||४||दुनिया चले ना श्रीराम के बिना
दुनिया चले ना श्रीराम के बिना |
रामजी चले ना हनुमान के बिना|| ध्रु. ||

सीताहरण की कहानी सुनो |
बनवारी मेरी जुबानी सुनो ||
सीताजी मिलेना श्रीराम के बिना |
पता चलेना हनुमान के बिना ||१||

लक्ष्मण का बचाना मुश्किल था |
कौन बूटी लाने के काबिल था ? ||
लक्ष्मण बचे ना श्रीराम के बिना |
बूटी मिलेना हनुमान के बिना ||२||

जबसे मैंने रामायण पढ़ली है |
मैंने एक बात समझली है ||
रावण मरे ना श्रीराम के बिना |
लंका जलेना हनुमान के बिना ||३||

सिंहासन पे बैठे है सीतारामजी |
चरणों मे बैठे है हनुमानजी ||
मुक्ति मिलेना श्रीराम के बिना |
शक्ति मिलेना हनुमान के बिना ||४||

Wednesday, March 17, 2010

मर्दाची तुटली बघारं ढाल |

मर्दाची तुटली बघारं ढाल |
रक्तानं शरीर झालं लाल ||
हाताला गुंडाळितो शाल |
झेलितो वार, वार बघा तलवार ||

किल्ला हा कोंढाणा श्रेष्ठ |
रक्षक उदयभान दुष्ट ||
करतो अबलांना भ्रष्ट |
तयाला करावया नष्ट ||
निघाला तान्हा हा झुंजार |
झेलितो वार वार बघा तलवार ||

मराठे मोगलास भिडले |
कैक चे धडशिर उड़ले ||
कैक ते धरणीवर पडले |
कैक ते दबा धरून बसले ||
गातो थोडासा आधार |
झेलितो वर वार बघा तलवार ||

बघा त्या कोंढाण्यावरती |
रक्तानं लाल झाली धरती ||
मराठे मागे ना फिरती |
वर्णु मी काय त्यांची किर्ती ||
शोधीतो थोडासा आधार |
झेलितो वार वार बघा तलवार ||

शिवबा म्हणे सिंह गेला |
अवघा महाराष्ट्र रडला ||
तुकड्या पुढे हेच गाणार |
झेलितो वार वार बघा तलवार ||

Thursday, March 4, 2010

हात जोडून अत्यंत नम्रपणे शिवाजी राजेंनी तुकाराम महाराजांना विचारले, “महाराज!, रामदास गोसावी काय करतात? त्यांचा पोशाख कसा असतो? ते आपल्यासारखेच गृहस्थ आहेत का?”

तेंव्हा तुकाराम महाराजांनी वर्णन करणारा एक अभंगच शिवाजी महाराजांना लिहून दिला.


हुर्मुजी रंगाचा उंच मोतीदाणा ।
रामदासी बाणा या रंगाचा ॥१॥

पीतवर्ण कांई तेज अघटित ।
अवाळू शोभत भ्रृकुटी माजी ॥२॥

रामनामुद्रा द्वादश हे टिळे ।
पुच्छ ते वळवळे कटीमाजी ॥३॥

कौपिन परिधान मेखला खांद्यावरी ।
तुंबा कुबडी करी समर्थांच्या ॥४॥

काष्टाच्या खडावा स्वामींच्या पायांत ।
स्मरणी हातात तुळशीची ॥५॥

कृष्णेच्या तटाकी जाहले दर्शन ।
वंदिले चरण तुका म्हणे ॥६॥